गर्भाधान के पवित्र क्षण से लेकर अग्नि में अंतिम आहुति तक, वैदिक परंपरा मानव जीवन की हर दहलीज़ को मंत्र, आशीर्वाद और श्रीभगवान के स्मरण में समेट लेती है। ये जीवन-संस्कार — षोडश संस्कार, सोलह पवित्रीकरण — मात्र अनुष्ठान नहीं हैं। ये वह प्राचीन शिल्प हैं जिनके द्वारा एक साधारण जीवन एक निरंतर यज्ञ, एक अखंड अर्पण बन जाता है।
पाँच सहज पाठों में यह पाठ्यक्रम आधुनिक गृहस्थ को प्रत्येक संस्कार से परिचित कराता है: हर संस्कार का अर्थ क्या है, परंपरा के अनुसार वह कब किया जाता है, किन शास्त्रों में उसका वर्णन है, और आज का परिवार उसे प्रामाणिकता तथा व्यावहारिक सरलता — दोनों के साथ कैसे निभा सकता है। इसी क्रम में आप जानेंगे कि वैष्णव आचार्यों ने इन संस्कारों को कैसे समझा — आत्मा को उसके जन्म से भी पहले भगवान के चरणकमलों से बाँध देने के साधन के रूप में।
हर जिज्ञासु के लिए सेवा के रूप में निःशुल्क अर्पित। संस्कृत या अनुष्ठान का कोई पूर्व ज्ञान आवश्यक नहीं — बस उस जीवन को पवित्र करने की इच्छा, जो आप और आपका परिवार पहले से जी रहे हैं।